सोमवार, 14 अगस्त 2017

जन्माष्टमी पर

आज फुर्सत में हूँ मैं ,कहाँ हो बोलो प्यारे 
तुमसे हैं बातें करनी,आ जाओ कान्हा प्यारे    

सदियों से देखें रस्ता ,ये आँखें जागी-जागी 
राह में ऐसे लगीं हैं , जैसे हों कोई अभागी 
मुरली की तान सुनाने ,कुछ मेरी भी सुन जाने 
आ जाओ कान्हा प्यारे 

गये तुम कौन गली हो ,तुम्हारे बिन हैं अधूरे 
श्याम तुम अन्तर्यामी ,दूर क्यों खड़े निहारो 
चल रहे सँग हमारे , सदा तुम बाहें थामे 
आ जाओ कान्हा प्यारे 

पहाड़ टूटा तो नहीं है ,नहीं है शिकायत करनी 
किसमें है मेरी भलाई ,प्रभु तू बेहतर जाने 
मगर मुझको आजमाने , फिर इक बार मुझे समझाने 
आ जाओ कान्हा प्यारे  

आज फुर्सत में हूँ मैं ,कहाँ हो बोलो प्यारे 
तुमसे हैं बातें करनी,आ जाओ कान्हा प्यारे 



गुरुवार, 27 जुलाई 2017

किसी आँच का धुआँ

ये मेरे साथ चल रहा है किसी आँच का धुआँ 
इतनी बदली हुई फ़िज़ाँ है के होशो-हवास में नहीं है समां 

ऐ वक़्त , इस ज़िल्लत का शुक्रिया ,
ये पीड़ा जो मुझे ले आई है कसक के इस मुकाम तक 
सीखा गई है जीना , टूट जाने तलक 

ज़िन्दगी ने बड़ी भारी कीमत माँगी है 
जो राह पहुँचाती है ज़िन्दगी तक , उसकी ही आहुति माँगी है 

चेहरों के पीछे का सच ,ये तुझको होगा मालूम 
मैंने नियति के आगे घुटने नहीं टेके 
सिर्फ नियति से लय मिलाने की कोशिश की है